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कम वजन वाले शिशु

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कम वजन वाले शिशु क्या होते हैं?

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 जन्म के समय वजन Meaning
More than 2.5 kg  (2.5 किलो से ज्यादा) सामान्य वजन बच्चा
1.5 – 2.5 kg (1.5 – 2.5 किलो) कम वजन वाला शिशु
Less than 1.5 kg (1.5 किलो से कम) बहुत कम वजन
  • जिस बच्चे का जन्म के समय वजन 2.5 किलो से कम होता है, उसे कम वजन वाला शिशु कहा जाता है। ऐसे बच्चों को ज्यादा पोषण, गर्माहट और विशेष देखभाल की जरूरत होती है।

    2.कम वजन वाले बच्चे होने के मुख्य कारण

    गर्भावस्था में सही खाना न खाना

    खून की कमी (एनीमिया) / कमजोरी और थकान

    पेट में बच्चे की सही वृद्धि न होना

    समय से पहले प्रसव

    3. कम वजन वाले बच्चे में खतरे के संकेत :

  • यदि बच्चे में ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर या अस्पताल ले जाएं:
  • बच्चा ठीक से दूध न पी रहा हो
  • सांस लेने में दिक्कत हो
  • बच्चा ठंडा महसूस हो
  • बहुत ज्यादा रोना या हमेशा सोते रहना
  • बुखार आना
  • शरीर या आंखें पीली होना

4. ऐसे बच्चों की देखभाल कैसे करें?

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✅ बच्चे को हमेशा गर्म रखें

✅ जन्म के तुरंत बाद मां का दूध दें

✅ हर 2 घंटे में दूध पिलाएं

✅ साफ-सफाई का ध्यान रखें

✅ बच्चे का वजन नियमित जांचें

✅ डॉक्टर की सलाह लेते रहें

5. बचाव:

  • प्रोटीन, फल, हरी सब्जियाँ और दूध वाला संतुलित आहार लें।
  • आयरन और कैल्शियम से भरपूर चीजें या डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयाँ नियमित लें।
  • गर्भावस्था में कम से कम 4 बार जांच (ANC Checkup) करवाएँ।
  • अच्छी नींद लें और तनाव मुक्त वातावरण रखें।
  • गर्भवती महिला का वजन नियमित रूप से चेक करवाएँ।

6. गर्भावस्था जांच का महत्व:

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  • गर्भावस्था के दौरान नियमित खून और पेशाब की जांच माँ और बच्चे के स्वास्थ्य की निगरानी करने में मदद करती है। ANC से एनीमिया, संक्रमण और गर्भावस्था में होने वाली डायबिटीज का पता लगाया जा सकता है।

7. गर्भावस्था में सुझाया गया वजन बढ़ना:

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गर्भवती महिला का वजन नियमित रूप से मॉनिटर करना बहुत ज़रूरी है। वजन सही तरीके से न बढ़ने पर कम वजन वाले शिशु का खतरा बढ़ जाता है।

8. गर्भावस्था में पोषण की आवश्यकताएँ :

  • प्रोटीन और ऊर्जा – चावल-दाल, रोटी-पनीर, रोटी-अंडा, रोटी-दूध
  • आयरन और विटामिन-C – सहजन के पत्ते, पालक पर नींबू डालकर आदि
  • कैल्शियम – दूध, दही, छाछ, लस्सी, तिल, मूंगफली, कमल ककड़ी आदि

9. फोलेट युक्त भोजन खाएँ :

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  • फोलिक एसिड – बीन्स, पालक, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दालें, मेवे और लीवर इसके अच्छे स्रोत हैं।
  • गर्भावस्था के पहले त्रैमासिक (पहले 12 सप्ताह) में फोलिक एसिड सप्लीमेंट (500µg या 0.5mg) लेने की सलाह दी जाती है।

10. विटामिन-C युक्त भोजन खाएँ :

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  • सहजन, अमरूद, अनानास और खट्टे फल जैसे नींबू व संतरा विटामिन-C के अच्छे स्रोत हैं। इनका सेवन करने से पौधों से मिलने वाले आयरन का अवशोषण बेहतर होता है।
  • गर्भावस्था के 12वें सप्ताह से लेकर स्तनपान के पहले 6 महीनों तक 60mg आयरन और 0.5mg फोलिक एसिड की सप्लीमेंट लेने की सलाह दी जाती है।
  • रोज़ 1 चम्मच आंवला पाउडर लें।

11. घर पर आंवला पाउडर बनाने की विधि:

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Step 1: आंवला तैयार करें

  • आंवले को अच्छी तरह धो लें ताकि सारी गंदगी निकल जाए।
  • साफ कपड़े से अच्छे से सुखा लें ताकि नमी न रहे।

Step 2: कद्दूकस करें और बीज निकालें

  • पूरे आंवले को कद्दूकस करें या छोटे टुकड़ों में काट लें।
  • बीच का सख्त बीज निकाल दें।

Step 3: सुखाने की विधि

  • धूप में सुखाना (सबसे अच्छा तरीका): कद्दूकस किए हुए आंवले को साफ सूती कपड़े या ट्रे पर फैला दें।
  • 3 से 7 दिन तक तेज धूप में रखें, जब तक आंवला पूरी तरह सूखकर कड़क न हो जाए।

Step 4: पीसना और स्टोर करना

  • सूखे आंवले को साफ और सूखे मिक्सर या ग्राइंडर में पीस लें।
  • बारीक छलनी से छान लें। बड़े टुकड़ों को दोबारा पीस लें।
  • तैयार आंवला पाउडर को एयरटाइट कांच के जार में ठंडी और सूखी जगह पर रखें। यह 6 से 12 महीने तक सुरक्षित रहता है।

12. कम खर्च वाला स्वस्थ गर्भावस्था आहार:

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सुबह खाली पेट:

  • 1 गिलास (250 ml) दूध + 1 चम्मच गुड़ + 5–6 मेवे (बादाम/अखरोट/किशमिश)

मध्य सुबह :

  • 1 गिलास छाछ या लस्सी

नाश्ता:

  • 2 पालक पराठा / दाल पराठा + पुदीना-धनिया चटनी + 30g प्याज

दोपहर का भोजन :

  • चावल / 2 रोटी (100g) + बड़ा कटोरा पालक दाल + 50g टमाटर/खीरा

शाम का नाश्ता :

  • 1 कप नींबू चाय (बिना चाय पत्ती) + 50g भुना चना

या

  • 1 गिलास सत्तू ड्रिंक

रात का भोजन :

  • 2 पालक-दाल वाली रोटी / गेहूं और बेसन के आटे की रोटी + मध्यम कटोरी कोई भी हरी पत्तेदार सब्जी + 50g प्याज और टमाटर

⭐ बची हुई सब्जी या दाल का उपयोग रोटी/चपाती का आटा गूंथते समय किया जा सकता है।

13. माल्टिंग :

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घर पर माल्टेड मिक्स बनाने की विधि :

Step 1: भिगोना

  • अनाज और दालों को अच्छी तरह धोकर 8–12 घंटे तक भिगो दें।

Step 2: अंकुरित करना

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  • इन्हें सूती कपड़े में बांधकर 1–2 दिन तक रखें, जब तक अंकुर न निकल आएँ।

Step 3: सुखाना

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  • अंकुरित अनाज को अच्छी तरह धूप में सुखा लें।

Step 4: भूनना

  • अच्छे स्वाद और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सभी चीजों को अलग-अलग सूखा भून लें।

Step 5: पीसना

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  • सभी चीजों का बारीक पाउडर बना लें और एयरटाइट डिब्बे में स्टोर करें।

 6 महीने से ऊपर के लिए:

  1. माल्टेड पॉरिज (सबसे अच्छा विकल्प)
  • 2 चम्मच माल्टेड पाउडर
  • दूध / पानी
  • थोड़ा गुड़ या मसला हुआ केला मिलाएँ।

2. खिचड़ी में मिलाएँ

  • 1 चम्मच माल्टेड पाउडर खिचड़ी में मिलाएँ।
  • इससे भोजन अधिक ऊर्जा वाला बनता है।

3. रागी माल्ट ड्रिंक

  • 4 चम्मच रागी माल्ट पाउडर
  • 200 ml दूध
  • 10g थोड़ा गुड़
  • यह कैल्शियम और आयरन से भरपूर होता है।

4. घर का बना सेरेलैक

इन चीजों को मिलाएँ:

  • 5g चावल पाउडर
  • 5g मूंग दाल पाउडर
  • 5g ड्राई फ्रूट पाउडर
  • 1 चम्मच माल्टेड पाउडर
  • सभी पाउडर को 30 ml दूध / पानी में मिलाकर तैयार करें।

बच्चों के लिए:

  • माल्टेड पाउडर को पॉरिज, खिचड़ी, दाल, सेरेलैक या दूध में मिलाकर दें।

शिशुओं (6–12 माह) के लिए माल्टेड आहार के फायदे:

1. पचाने में आसान

अंकुरण (माल्टिंग) के बाद अनाज नरम हो जाता है और उसमें मौजूद स्टार्च टूट जाता है, जिससे शिशु इसे आसानी से पचा सकता है।

2. पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण

माल्टिंग से ऐसे तत्व कम हो जाते हैं जो आयरन, कैल्शियम और जिंक के अवशोषण में बाधा डालते हैं। इससे शरीर को पोषक तत्व अधिक मात्रा में मिलते हैं।

3. ऊर्जा (ताकत) अधिक मिलती है

माल्टेड आहार से बना दलिया पतला होने पर भी अधिक पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर होता है, जो शिशु की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है।

4. वृद्धि और विकास में सहायक

इसमें उपलब्ध पोषक तत्व शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में सहायता करते हैं।

5. विटामिन की मात्रा बढ़ती है

अंकुरण के दौरान कुछ बी-विटामिन और अन्य लाभकारी पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है।

6. स्वाद बेहतर होता है

  • माल्टिंग के कारण भोजन में हल्की प्राकृतिक मिठास आ जाती है, जिससे शिशु इसे अधिक पसंद करते हैं।
  • माल्टेड आहार शिशुओं के लिए सुपाच्य, पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर होता है, जो उनके स्वस्थ विकास और वृद्धि में मदद करता है।

6–12 माह के शिशुओं के लिए माल्टेड गेहूं

6 महीने की उम्र के बाद, माँ के दूध के साथ-साथ शिशु को पूरक आहार (Complementary Feeding) के रूप में माल्टेड गेहूं दिया जा सकता है।

कितनी मात्रा दें?

  • 6–8 माह के शिशु :

10–15 ग्राम माल्टेड गेहूं का आटा लगभग 1–1½ बड़ा चम्मच प्रति बार

  • 9–12 माह के शिशु:

15–25 ग्राम माल्टेड गेहूं का आटा लगभग 1½–2½ बड़ा चम्मच प्रति बार

कितनी बार दें?

  • 6–8 माह: दिन में 1–2 बार
  • 9–12 माह: दिन में 2–3 बार

बनाने की विधि:

  • माल्टेड गेहूं के आटे को पानी या दूध में अच्छी तरह पकाकर पतला और मुलायम दलिया बनाएं।
  • पोषण और ऊर्जा बढ़ाने के लिए इसमें थोड़ा घी, दूध, मसला हुआ फल या पकी हुई दाल मिला सकते हैं।

ध्यान रखें:

  • 6 महीने तक केवल माँ का दूध दें।
  • 6 महीने के बाद भी स्तनपान जारी रखें और साथ में पूरक आहार दें।
  • भोजन हमेशा ताजा, साफ और अच्छी तरह पका हुआ होना चाहिए।

माताओं के लिए:

  • आटे में मिलाकर रोटी या पराठा बनाएँ।
  • माल्टेड हेल्थ ड्रिंक या लड्डू तैयार करें।
  • अतिरिक्त प्रोटीन और ऊर्जा के लिए सूप और दाल में मिलाएँ।
  • माल्टिंग से पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है और भोजन अधिक ऊर्जा युक्त बनता है, जो शरीर की रिकवरी और स्वस्थ विकास के लिए लाभकारी है।

14.  किन खाद्य पदार्थों और आदतों से बचें :

  • तंबाकू और धूम्रपान से बचें।
  • शराब का सेवन न करें।
  • अधिक चाय और कॉफी का सेवन न करें।
  • जंक फूड खाने से बचें।
  • खाना छोड़ना नहीं चाहिए।

15. कम वजन वाले शिशु की देखभाल :

  • पहले 6 महीनों तक केवल माँ का दूध दें।
  • जन्म के 1 घंटे के अंदर स्तनपान शुरू कर देना चाहिए।
  • कोलोस्ट्रम (पीला गाढ़ा दूध) बच्चे का पहला टीका होता है।
  • साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखें।
  • समय पर टीकाकरण करवाएँ।
  • नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएँ।

16. कंगारू मदर केयर :

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  • बच्चे को माँ के सीने से त्वचा से त्वचा संपर्क में रखा जाता है।
  • इससे बच्चे को गर्माहट मिलती है, स्तनपान बेहतर होता है और वजन बढ़ने में मदद मिलती है।

17. कब तुरंत अस्पताल ले जाएँ:

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  • बच्चा दूध नहीं पी रहा हो।
  • तेज सांस चल रही हो।
  • शरीर या त्वचा नीली पड़ जाए।
  • झटके आ रहे हों।
  • बहुत ज्यादा कमजोरी या बुखार हो।

18. सरकारी सहायता और सामुदायिक सेवाएँ :

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  •  आंगनवाड़ी में गर्भावस्था जांच करवाएँ।
  • मुफ्त आयरन और कैल्शियम की गोलियाँ उपलब्ध हैं।
  • जननी सुरक्षा योजना का लाभ लें।
  • पोषण अभियान से जुड़ें।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए टेक-होम राशन उपलब्ध होता है।

सही पोषण, स्वस्थ शिशु

गर्भावस्था में का रखें ध्यान, तभी स्वस्थ होगा नन्हा जान


धन्यवाद

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About Dr Veena Aggarwal

Dr Veena Aggarwal (Nutrition) - Honorary Senior Advisor, Arpana Reasearch & Charities Trust She is a distinguished healthcare professional with over five decades of experience in research, teaching, and clinical practice. Beginning her career at AIIMS, New Delhi in 1967, she has worked extensively on nutrition and its role in addressing core health issues.